26 January Republic Day In Hindi Essay On Diwali

नमस्ते दोस्तों ! HimanshuGrewal.com मै, में आज आपको Republic Day Essay in Hindi के बारे मै बताउंग जिसको हिन्दी में gantantra diwas कहते है और बताऊंगा की गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है.

गणतंत्र दिवस भारत देश का सबसे प्रमुख त्यौहार है. पूरा देश इस त्योहार हो बहुत ही उल्लास के साथ मनाता है. gantantra diwas nepal, india और कई देशो में मनाया जाता है. इस दिन लोग टीवी पर republic day parade देखते है, song सुनते है, स्पीच सुनते है और इतना ही नही सभी लोग republic day images download करके उसको social media पर शेयर करके gantantra diwas celebrate करते है.

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स्कूल में तो छोटे-छोटे बच्चे गणतंत्र दिवस पर भाषण देते है और गणतंत्र दिवस पर कविता लिखकर उसको सभी के सामने प्रकट करते है. तो चलिए दोस्तों अब essay on rebulic day in hindi को शुरू करते है.”

Republic Day Essay in Hindi | गणतंत्र दिवस पर निबंध

हर साल भारत में जो दो-चार राष्ट्रीय पर्व मनाए जाते हैं. 26 जनवरी के दिन मनाया जाने वाला गणतंत्र-दिवस उन सभी में सबसे प्रमुख एवं महत्वपूर्ण पर्व या उत्सव है। हमारा देश 15 अगस्त, सन् 1947 के दिन लगभग दो शताब्दी तक परतंत्रता की यातनाएँ भोगते रहने और अनेक प्रकार के त्याग और बलिदान करने के बाद कहीं जाकर भारत देश स्वतंत्र हुआ था.

परतंत्र भारत में विदेशी, ब्रिटिश शासन द्वारा अपने स्वार्थ साधने के लिए बनाया गया संविधान ही चलाया करते थे । उस शोषक और प्रर्पोड्‌क मनोवृत्ति वाले संबिधान के बल पर ही अंग्रेज यहाँ राज-काज चलाया करते थे.

अत: स्वतंत्रता-प्राप्ति के तत्काल बाद इस कटु तथ्य का अनुभव किया गया, साथ ही यह निर्णय भी किया गया कि भारत जैसे साँस्कृतिक द्रष्टी से बहु आयामी देश में ऐसा संविधान लागू होना चाहिए कि जो सामूहिक स्तर पर सभी का हित-साधन कर सके.

भारत की सास्कृतिक गरिमा और अनेकता के साथ-साथ एकता के तत्त्वों को भी उजागर कर सके । विशेषज्ञों की गठित समिति द्वारा बडे परिश्रम से स्वतंत्र भारत का अपना और नया संविधान तैयार किया गया.

वह संविधान जो वास्तव में 26 जनवरी के दिन गणतंत्र दिवस जैसा पवन राष्ट्रीय पर्व मनाने का मूल कारण है. स्वतंत्र भारत का अपना संविधान 26 जनवरी, सन् 1950 के दिन लागू किया गया. इस दिन से संविधान की प्रमुख धाराओं के अनुसार भारत को एक सर्वसत्ता-सम्पन्न गणराज्य और गणतंत्र घोषित किया गया. इसी गणतंत्री संविधान के अनुसार यह भी इसी दिन घोषित किया गया कि देश की सर्वोच्च सत्ता जिस व्यक्ति के अधीन रहेगी, उसे राष्ट्रपति कहा जाएगा.

भारत का पहला राष्ट्रपति कौन होगा, इसकी घोषणा भी इसी तारीख को की गई। मुख्यत: इन्हीं कारणों से सारा भारत हर वर्ष छब्बीस जनवरी का दिन ‘गणतंत्र-दिवस’ के रूप में एक महान् राष्ट्रीय पर्व मानकर बड़ी सजधज के साथ पूर्ण उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है.

गणतंत्र-दिवस का राष्ट्रीय पर्व भारत तथा भारत के बाहर प्रत्येक उस स्थान पर मनाया जाता है जहा पर भारतीय मूल का एक भी व्यक्ति निवास कर रहा है; पर एक तो दिल्ली के राजधानी होने और दूसरे राष्ट्रपति का निवास यहीं पर होने के कारण केन्द्रीय स्तर पर यह पर्व यहीं नई दिल्ली में ही मनाया जाता है.

इसकी तैयारी एक महीनें पहले से आरम्भ हो जाया करती है| यहाँ पर प्रत्येक लोक सास्कृतिक दल बनाकर अपने-अपने प्रान्त की सम्पूर्णता प्रकट करने वाली झांकियों को बनाने लग जाया करते हैं, नृत्य-संगीत आदि लोक-कलाओं के प्रदर्शन की तैयारियों में भी जुट जाया करते हैं। दिल्ली के छावनी क्षेत्र में भी सैनिकों, एन०सी०सी० आदि के द्वारा परेड के पूर्वाभ्यासों के कारण विशेष हलचल सुनाई देने लग जाती है.

समाचार पत्र 26 january की तैयारियो का जायजा और उसको प्रस्तुत करने का काम पहले से ही करने लगते हैं. अपनी जानकारियों के आधार पर यह भी बता देते हैं कि इस बार गणतंत्र परेड के अवसर पर राष्ट्रपति के साथ किस देश का व्यक्ति मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेगा.

26 जनवरी की सुबह प्रधानमंत्री तीनों सेनाओं के सेनापतियों के साथ मिलकर पहले इण्डिया गेट पर जल रही अमर जवान ज्योति पर पहुँचकर अज्ञात-अमर शहीदों को सलामी- श्रद्धांजलि देते हैं, फिर राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए राष्ट्रपति भवन के सामने स्थित विजय चौक पर आ जाते हैं। तब तक अन्य गण्य मान्य अतिथि, दर्शक आदि भी आ चुके होते हैं.

इसके बाद आगमन होता है विदेशी अतिथि के साथ राष्ट्रपति का, जिनका बिगुल आदि बजाकर स्वागत् किया जाता है| कई बार इस अवसर पर राष्ट्रपति कुछ विशिष्ट अलंकरण र्भो प्रदान किया करते हैं | इसके ध्वजारोहण और फिर सेना के तीनों अंगों, इक्कीस तोपों की सलामी दी जाती है.

अन्य सैनिक-अर्द्धसैनिक बल भी एक-एक करके सलामी देते हुए मंच के सामने से गुजर जाते हैं। फिर आधुनिकतम शस्त्रों का प्रदर्शन, तरह-तरह के बैण्ड, प्रान्तों की झाँकियाँ और उनके साथ लोक-कलाकारों के प्रदर्शन, स्कूलों की छात्र-छात्राओं द्वारा रंग-बिरंगे प्रदर्शन आदि का कार्यक्रम दोपहर तक चलता रहता है.

दोपहर तक परेड प्रदर्शन करने वाले सभी जन जब मार्च करते लाल किले पर पहुँच जाया करते हैं, तब मुरप्न पर्व थमता है । फिर दो दिन बाद जब परेड का राष्ट्रपति भवन तक प्रत्यावर्तन हो जाया करता है, तभी गणतंत्र पर्व का समापन माना जाता है| इन दिनों सायंकाल विजय चौक के लीन में सैनिक बैण्डों का सुन्दर संगीतमय कार्यक्रम भी प्रस्तुत करने की परम्परा है.

रात के समय राष्ट्रपति भवन, संसद भवन तथा अन्य सभी प्रमुख सरकारी भवन विद्युत्यकाश की अनोखी छटा का प्रदर्शन किया करते हैं. रंगारंग आतिशबाजी भी चलाई जाती है. इस प्रकार सभी तरह के आयोजन भारतीय गणतंत्र की गरिमा और गौरव के अनुरूप ही हुआ करते हैं. उन्हें निहार कर प्रत्येक भारतीय का सीना गर्व से भरकर कहने को बाध्य हो उठा करता है. अमर रहे भारतीय गणतंत्र ।

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दोस्तों इस आर्टिकल में मैंने Republic Day Essay in Hindi की पूरी जानकारी शेयर कर दी है और आपसे भी बस इतनी सी गुजारिश है की इस इनफार्मेशन को आप अपने दोस्तों के साथ फेसबुक, ट्विटर और गूगल प्लस पर शेयर जरुर करे. 🙂 आप सभी लोगो को हिमांशु ग्रेवाल की तरफ से गणतंत्र दिवस की शुभकामनाए. 🙂

गणतंत्र दिवस का इतिहास | (Gantantra Diwas) Republic Day History Speech In Hindi

जकड़न/बंधन एक ऐसी कड़ी है जिससे, हर कोई मुक्त होना चाहता है. जब एक परिन्दे को भी, पंख फैला कर उड़ने की चाह होती है तो, इंसान की आजादी तो, आम बात है. आजादी को संजोये रखना, इतना भी आसान नही है. उसके लिये, अगली योजनायें बनाना और उनको क्रियान्वित करना बहुत ही जरुरी था. जिसके लिये, भारत के संविधान की रचना करना और उस संविधान मे, नियम कानून और शर्तो को लागू करना बहुत आवश्यक था. जिसके लिये एक समिति बनाई गई और उस समिति के द्वारा संविधान का निर्माण किया गया. और 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू किया गया. इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप मे मनाया जाता है . गणतंत्र दिवस को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया. गणतंत्र दिवस भारत वासियों के लिये किसी पर्व से कम नही है. यह बहुत ही शुभ और ऐतिहासिक दिन है ये, प्रत्येक भारतवासी के लिये. इस ऐतिहासिक दिन को, हर छोटे से छोटा व ,बड़े से बड़ा व्यक्ति, तथा सरकारी व अर्द्ध सरकारी,प्राइवेट व निजी संस्थान, ऑफिस, स्कूलों मे हर्ष उल्लास के साथ बनाया जाता है.

भारतीय संविधान के अनुसार

1947, एक ऐसा वर्ष जिसे कोई नही भी नही भूल सकता. भारत के इतिहास मे स्वर्णिम अक्षरों मे लिखा जायेगा . यह ऐसा वर्ष जिसमे भारत अपनी सदीयों की दासता से आजाद हुआ .

  1. गणतंत्र दिवस का इतिहास
  2. गणतंत्र दिवस से जुड़े कुछ तथ्य

गणतंत्र दिवस का इतिहास  ( Republic Day History In Hindi)

सदियों से सहन कर रहे अग्रेजों के अत्याचार व छल पूर्ण व्यवहार से सन 1947 को स्वतंत्रता प्राप्त कर संविधान निर्मात्री समिति के द्वारा संविधान का निर्माण कर उन उद्देश्यों को प्राप्त करे, जिनके लिये स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी तब जा कर 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया .

संक्षिप्त प्रारूप

इस प्रकार उपरोक्त प्रारूप गणतंत्र दिवस के निर्माण को बताता है.

गणतंत्र दिवस से जुड़े कुछ तथ्य (Republic Day Facts)

हम सब इस बार अपना 68वा गणतंत्र दिवस बनाने जा रहे है. इससे संबंधित कुछ बाते हम बचपन से सुनते आ रहे है. इसे मुख्य रूप से भारत की राजधानी अर्थात् दिल्ली मे बनाया जाता है. दिल्ली मे भव्य रूप से सूरज की सुहानी किरणों के साथ ही परेड निकली जाती है जो कि, राजपथ से इंडिया गेट तक जाती है. इसी के साथ इस दिन जल सेना,थल सेना, व वायु सेना भी परेड मे भाग लेती है, और सलामी देते हुए, अपने करतब दिखाती है. इसी के साथ इस दिन, प्रधानमंत्री अमर जवान ज्योति पर पुष्पमाला अर्पित करते है. शहीद जवानों को श्रध्दान्जली देते है. राष्ट्रपति जी अपनी सुरक्षा बल तथा 14 घोड़ो से सजी बगी मे बैठ कर इंडिया गेट पर आते जहा उनका स्वागत प्रधानमंत्री द्वारा किया जाता है . उसके उपरान्त राष्ट्रपति जी द्वारा 26 जनवरी को, राष्ट्रीयध्वज फहराया जाता है. उसके उपरान्त ,समानित ध्वज के सामने सभी गणमान्य लोग ,व राष्ट्रपतिजी ध्वज के सम्मान मे, राष्ट्रीयगान गाया जाता है . हर एक राज्य द्वारा अपने लोक न्रत्य प्रस्तुत किये जाते है.

21 तोपों की सलामी दी जाती है. इसी के साथ कई मनोहार प्रस्तुति होती है.

गणतंत्र दिवस पर कुछ पंक्तिया इस प्रकार है..(Republic Day Special Lines)

बहुत सी चाह है हर किसी के मन मे, पर कोई बया नही कर पाता .

उड़ने की चाह तो है मन मे, पर उड़ नही पाता .

क्यों है, डर आज भी मन मे,

आजाद हुए सालो हो गये, क्यों कोई खुल कर जिंदगी जी नही पाता .

अब तो छोड़ो आतंकवाद, भ्रष्टाचारी,कालाबाजारी,घूसखोरी को

छोटी सी है जिंदगी, अब तो ज़ी लों अपनी आजादी को.

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Priyanka

प्रियंका दीपावली वेबसाइट की लेखिका है| जिनकी रूचि बैंकिंग व फाइनेंस के विषयों मे विशेष है| यह दीपावली साईट के लिए कई विषयों मे आर्टिकल लिखती है|

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